‘G.O.D’ Review: ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ जैसी है ‘गॉड ऑफ धर्मापुरी’ सीरीज

गॉड ऑफ धर्मापुरी 10 एपीसोड की सीरीज Zee5 पर रिलीज हुई है। यह सीरीज वैसे तो अंग्रेजी सबटाइटल के साथ तेलगु भाषा में है लेकिन हिन्दी समझने वालों के लिए इसको हिन्दी में भी डबिंग किया गया है। यह सीरीज धर्मापुरी नामक एक जगह की सत्ता पर आधारित है, जिसके लिए सीरीज की शुरूवात से लेकर अंत तक ख़ूनख़राबा चल रहा है। सीरीज के बारे में जानने के लिए एक नज़र देखें।

निर्देशक: अनीस कुरूविल्ला

लेखक: अनीस कुरूविल्ला, हमजा अली

कलाकार: अनीस कुरूविल्ला,राज दीपक शेट्टी, सुरूती जयन, सत्यदेव कंचरना, कार्तिक रथनम

प्लेटफार्म: Zee5

कहानी को वो आसानी से समझ सकता है, जिसने गैंग्स ऑफ वासेपुर देखी है। क्योंकि सीरीज की कहानी भी कुछ वैसे ही शुरू होती है। एक आदमी प्रताप रेड्डी (राज दीपक शेट्टी) अपनी पत्नी सरोजा (सुरूती जयन) और दो बच्चों वेणु रेड्डी (सत्यदेव कंचरना) और रवि रेड्डी (कार्तिक रथनम) के साथ धर्मापुरी नामक एक जगह पर आता है। प्रताप अपने दोस्त छालापति (जगदीश प्रताप बंदारी) के साथ एक खादान में पत्थर तोड़ने का काम शुरू कर देता है।

धर्मापुरी में डी.एन रेड्डी (एल.बी.श्रीराम) का शासन चलता है। वही धर्मापुरी का मालिक है। डी.एन रेड्डी ने एक दैत्य जैसा ख़तरनाक गुंड़ा ओडप्पा पाल रखा है। जो उसके ख़िलाफ जाने वालों को बुरी तरह मारता है और सारे धर्मापुरी के लोग उस से डरते हैं।

एक पढ़ा लिखा कमयूनिष्ट लीड़र रंगाराव (जॉन  कोट्टोली) डी.एन रेड्डी के ख़िलाफ पर्चेबाजी करता रहता है लेकिन डी.एन रेड्डी का ख़तरनाक ओडप्पा कम्यूनिष्टों को देखते ही मार देता है।

ओडप्पा खादान में काम करने वालों से अपना हिस्सा लेता है। प्रताप रेड्डी ओडप्पा को पैसे नहीं देता है। ओडप्पा प्रताप रेड्डी को मारने के लिए आता है लेकिन प्रताप रेड्डी ही दैत्य जैसे ओडप्पा को मार देता है। उसके मरते ही रंगाराव प्रताप को समर्थन में आ जाता है। प्रताप और रंगाराव मिलकर डी.एन रेड्डी की सत्ता को ख़त्म कर देते हैं। धर्मापुरी में प्रताप रेड्डी का शासन हो जाता है। गैंग्स ऑफ वासेपुर में जैसे सरदार सिंह का हो जाता है।

सीरीज के पांच एपीसोड के बाद प्रताप रेड्डी को दोनों बेटे वेणु रेड्डी और रवि रेड्डी बडे हो जाते हैं। कहानी यहां से हॉलीवुड की फ़िल्म गॉडफादर के जैसी हो जाती है। प्रताप रेड्डी पर हमला होता है। प्रताप रेड्डी की जान तो बच जाती है। प्रताप के घर पर हमला होता है। उसके दोनों बेटों पर हमला होता है। अपने परिवार को बचाने के लिए प्रताप का पढ़ा लिखा बड़ा बेटा वेणु रेड्डी ना चाहते हुए भी अपने पिता के दुश्मनों को एक-एक कर ख़त्म करता है। प्रताप रेड्डी एक बार फिर धर्मापुरी का गॉड फादर बन जाता है।

सिनेमा की नज़र से

इस सीरीज की कहानी तो छोडिए ध्यान से देखने पर सारे किरदार भी गैग्स ऑफ वासे पुर की कॉपी जैसे लगेंगे। सीरीज के बहुत सारे सीन और सिच्वेश्न भी गैग्स ऑफ वासेपुर जैसे हैं। यह सीरीज देखते हुए कई जगह ऐसा लगेगा कि यही चीज गैंग्स ऑफ वासेपुर में देख चुके हैं। लेकिन ख़ास बात यह है कि उसके बाद भी देखने पर मजा आता है।सीरीज के पांच एपीसोड के बाद कहानी का प्लाट और सीन गॉड फादर के जैसे हो जाते हैं।

गॉड ऑफ धर्मापुरी की कहानी 60-70 के दशक से शुरू होती है। अंग्रेजों के जाने के बाद किस तरह सत्ता के लिए लोग आपस में ही लड़ रहे थे। किस तरह एक दूसरे से ख़फा होकर नयी-नयी पार्टियां बन रही थीं। कम्यूनिष्ट पार्टियां समाजवादी पार्टी के रूप में किस तरह काम रही थीं। राजनीति कैसे बदल रही थी। अख़बार कैसे काम कर रहे थे। यह सब दिखाने में निर्देशक अनीस कुरूविल्ला काफी सफल रहे हैं।

इस सीरीज का संगीत काफी हद तक सीन की आत्मा तक पहुंचता है। जो सीन की सिच्वेशन के हिसाब से मंनोरंजन भी करता है और इमोशनल भी करता है। यही हाल सिनेमॉटोग्राफी का भी है, कुछ सीन तो बहुत ही अच्छे से लिए गये हैं, जिस से उस जगह की ज़्योग्राफी समझ में आ जाती है लेकिन कुछ सीन बहुत ही साधारण तरीके से लिए गये हैं। सिनेमाटोग्राफी ठीक-ठाक ही कही जा सकती है।

कास्टिंग और कोस्टयूम डिजायनर की तारीफ करनी होगी। कुछ किरदारों को छोड़कर हर किरदार अपने आप में परफेक्ट है। कुछ किरदारों का पहनावा उनका लुक भी देखने वालों को ध्यान खींचता है।

यह चीजें हज़म नहीं होती हैं

आधी सीरीज के बाद वेणुगोपाल रेड्डी का किरदार ही मुख़्य किरदार बन जाता है। इस किरदार को कभी-कभी समझने में मुश्किल होती है। यह किसी के बीवी बच्चों को किडनेप करा लेता है। अपने मतलब के लिए एक लड़की के इमोश्न से खेल जाता है। यह किरदार थोड़ा कंफयूज करता है। कम्यूनिष्ट लीड़र रंगाराव की पोलीटिक्स भी साफ  नज़र नहीं आती है।

धर्मा पुरी सीरीज में कहने को एक विधानसभा सीट है, लेकिन कैमरे पर एक छोटा सा गांव भी नहीं दिखाई देता है। वहीं शुरू से आखिर तक बस कुछ ही चेहरे दिखाई देते रहते हैं।